कजली महोत्सव: रंगाई-पुताई की आस लगाए वीर आल्हा-ऊदल की प्रतिमाएं

कजली महोत्सव: रंगाई-पुताई की आस लगाए वीर आल्हा-ऊदल की प्रतिमाएं

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    आल्हा चौक
(इमरान खान)
महोबा। वीरों की भूमि कहे जाने वाले महोबा के इतिहास के वीर योद्धा आल्हा और ऊदल का बुंदेलखंड में अपना अमिट इतिहास रहा है। जिनके नाम पर महोबा को समस्त भारत में जाना जाता है। इस साल इन दिनों में कजली महोत्सव और आल्हा की गूंज दोनों ही दिखाई सुनाई नहीं देंगे। निराशा ये भी है कि आल्हा और ऊदल चौक में स्थित इन वीरों की प्रतिमाएं भी रंगाई-पुताई से वंचित रहेंगी।
कर्फ़्यू की घोषणा के साथ बढ़ते लॉकडाउन ने ग़रीब और आमजन से लेकर शासन-प्रशासन को भी काफ़ी प्रभावित किया है। इस कारण पर कजली महोत्सव निरस्त होने से  ग्रामीण व शहरी परिवेश में त्योहार को लेकर उत्साह की कमी देखने को मिल रही है। लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि इस वार्षिक पर्व को प्रशासन में अधिक उदासीनता छाई हुई है। क्योंकि महोत्सव की मद का धन नहीं आया इसलिए नगर पालिका प्रशासन मौजूदा साल में अमर वीर आल्हा और उदल की प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई का कार्य नहीं करेगा। नगर पालिका अधिशासी अधिकारी लालचंद सरोज का कहना है कि कोरोना ने हमारी व्यस्तता और समस्याएं बढ़ा दी हैं इसलिए इस वर्ष आल्हा ऊदल की प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई का कार्य नहीं करवा पाएंगे।
ग़ौरतलब है कि आम जनता और समाजसेवियों में वीरभूमि की पहचान आल्हा और ऊदल की प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई न होने से सुगबुगाहट और नाराज़गी है।
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